फिरोजपुर (जतिन्द्र पिंकल) : कंबोज फाउंडेशन के एक उच्च स्तरीय और प्रतिष्ठित प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल में डॉ. संदीप सिंह कौरड़ा, विधायक जगदीप कंबोज गोल्डी और जज जगदीप मारोक सहित फाउंडेशन के अध्यक्ष, चेयरमैन, सीनियर वाइस चेयरमैन, वाइस प्रेसिडेंट, महासचिव, कोषाध्यक्ष और लगभग 20 कार्यकारी सदस्य शामिल थे।
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें पंजाब सरकार से अपील की गई कि पंजाब विधानसभा का एक विशेष सत्र सुनाम ऊधम सिंह वाला में बुलाया जाए। इस सत्र में ‘ऊधम सिंह शहीद स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी’ की कानूनी स्थापना की घोषणा करने की मांग की गई।
यह विश्वविद्यालय पंजाब सरकार और कंबोज फाउंडेशन द्वारा शहीद ऊधम सिंह एजुकेशनल सोसायटी के सहयोग से एक संयुक्त पहल है। इसे देश के महान शहीद ऊधम सिंह जी को समर्पित एक जीवंत श्रद्धांजलि के रूप में देखा जा रहा है।
फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि विश्वविद्यालय की नींव 31 जुलाई को ऊधम सिंह जी के शहादत दिवस के अवसर पर रखी जाएगी, जिससे इस परियोजना को विशेष ऐतिहासिक महत्व मिलेगा। इसके साथ ही कानून पारित होने के बाद विश्वविद्यालय का पहला शैक्षणिक सत्र शुरू करने की योजना भी साझा की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने जानकारी दी कि यह विश्वविद्यालय विश्व स्तरीय और विशिष्ट संस्थान होगा, जहां छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें आधुनिक और व्यावहारिक कौशल सिखाकर देश और विदेश में रोजगार योग्य बनाया जाएगा। यहां से पढ़कर निकलने वाले युवा स्वयं रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकेंगे।
फीस संरचना के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि कुछ छात्रों की फीस उद्योग क्षेत्र द्वारा वहन की जाएगी, कुछ की फीस सरकार के स्किल डेवलपमेंट विभाग द्वारा दी जाएगी, जबकि बाकी छात्रों को एजुकेशन लोन की सुविधा प्रदान की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि यह विश्वविद्यालय जिला कपूरथला के सुभानपुर में स्थापित किया जा रहा है और यह विदेश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों के साथ मिलकर काम करेगा, जिससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और अनुभव प्राप्त होगा।
बैठक के अंत में सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यह पहल न केवल शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि देश के शहीदों की महान विरासत को हमेशा जीवित रखने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।