फगवाड़ा  (पुनीत) : श्री मनसा देवी (ज्वाला जी) मंदिर सतनामपुरा फगवाड़ा में शरद पूर्णिमा की शुभ बेला पर माता मनसा देवी महिला संकीर्तन मंडली के द्वारा मंगलवार का सप्ताहिक महिला संकीर्तन करवाया गया। इस दौरान महिलाओं ने माता रानी की महिमा का सुन्दर गुणगान किया। श्रद्धालुओं ने बढ़-चढक़र मां भगवती के दर्शन किये और भजन कीर्तन के पश्चात कंजक पूजन एवं महाआरती का आयोजन हुआ। प्रबंधकों ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। यह वर्ष की सबसे शुभ और पवित्र पूर्णिमा मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होकर आकाश में उदित होता है और माना जाता है कि उसकी किरणों से अमृत बरसता है। इसी कारण इस दिन को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव की पूजा के साथ-साथ मां लक्ष्मी और चंद्र देवता की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा इस दिन व्रत कथा का पाठ करना बहुत ही जरूरी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और उन घरों में स्थायी रूप से निवास करती हैं, जहाँ लोग जागरण कर उनका ध्यान और पूजन करते हैं। इसीलिए इस दिन लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस रात जागरण करता है, वह वर्षभर सुख, समृद्धि और धन-धान्य से संपन्न रहता है। इस दिन चंद्रमा का दर्शन करना भी शुभ माना गया है, क्योंकि चंद्रमा को शीतलता और मानसिक शांति का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रकिरणों में अमृत तत्व होता है। इसलिए परंपरा रही है कि इस रात को दूध और चावल से बनी खीर को खुले आकाश के नीचे रखा जाता है, ताकि उसमें चंद्र किरणों का अमृत रस समाहित हो सके। अगले दिन यह खीर प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है, जो स्वास्थ्य और सौभाग्य दोनों प्रदान करती है। पौराणिक कथा के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज की गोपियों के साथ महारास किया था। कहा जाता है कि उस दिव्य रास में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से प्रत्येक गोपी के साथ अलग-अलग रूप में नृत्य किया। यह प्रेम, भक्ति और आत्मा के ईश्वर से मिलन का प्रतीक माना गया। इसी कारण इस पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस विशेष अवसर पर श्री स्वामी शंकर नाथ पर्वत मठ चैरिटेबल एवं वेलफेयर ट्रस्ट नकोदर रोड हदियाबाद फगवाड़ा द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। सेवा निभाने वालों में मुख्य रूप से बृजभूषण जलोटा, रणबीर दुग्गल, लोकेश नारंग, विवेक हांडा, पवन कश्यप, ललित तिवारी, प्रकाश यादव, वत्सल तिवारी, कन्हैया कुमार, ईशु शर्मा, हितेश गोगा, सोनू सैनी एवं महिला संकीर्तन मंडली से सुमन सेठ, रेनू अरोड़ा, माधुरी शर्मा, रमा शर्मा, कुलवंत कौर, बलविंदर कौर, रुपिंदर कौर, परवीन शर्मा, रिचा तिवारी, कविता शर्मा, हिमांशी शर्मा, ज्योति शर्मा, कुसुम शर्मा, अरुणा लेखी, पूजा शर्मा, चारुल शर्मा, मुस्कान शर्मा, मधु शर्मा, सुनीता आदि उपस्थित थे।