कोटकपूरा/जैतो (विपन मित्तल) : अहोई अष्टमी एक महत्वपूर्ण व्रत है जो माताओं द्वारा अपने पुत्रों की लंबी उम्र, खुशी और कल्याण के लिए रखा जाता है। श्रद्धालु माताएं देवी अहोई की पूजा करके अपने बच्चों की समृद्धि के लिए उनका आशीर्वाद मांगती हैं।यह व्रत उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिन्हें गर्भपात, गर्भधारण करने में कठिनाई या संतानहीनता का अनुभव हुआ हो। माना जाता है कि अहोई अष्टमी की पूजा और व्रत करने से उन्हें एक स्वस्थ बच्चे का आशीर्वाद मिलता है।माताओं ने सुबह से शाम तक कठोर निर्जला उपवास रखा और तारों को देखने के बाद ही इसका उपारन करेंगी।जैतो वुमैनज क्लब अध्यक्षा रीना गोयल, रितु तायल, अंजू रानी , मानसी तायल, मनप्रीत कौर, अंजलि तायल, ऊषा गर्ग आदि ने विधिवत पूजा अर्चना की।दीवार पर अष्ट कोष्ठक की अहोई की पुतली रंग भर कर बनाई । उस पुतली के पास छपी हुई अहोई अष्टमी का चित्र मंगवाकर दीवार पर लगाया तथा पूजन कर सूर्यास्त के बाद अर्थात् तारे निकलने पर अहोई माता की पूजा करने से पहले पृथ्वी को पवित्र करके चौक पूज कर एक लोटा जल भरकर एक पटले पर कलश की भाँति रखकर पूजा की व अहोई की रोली, चावल दूध व भात से पूजा करके जल से भरे लोटे पर सतिया बनाया। एक कटोरी में हलवा तथा पैसे निकाल कर रखे और सात दाने गेहूं के लेकर कहानी सुनने के बाद जो पैसे पहले से निकालकर रखे थे,उसे सासू जी के चरण स्पर्श कर श्राद्ध पूर्वक उन्हे दिए। ऐसा करने से अहोई माता प्रसन्न हो बच्चों की दीर्घायु करके घर में नित नये मंगल करती रहती हैं।निःसंतान दम्पति अहोई अष्टमी को शुभ मानते हैं और अक्सर मथुरा के राधा कुंड में पवित्र स्नान करते हैं। भक्त दैवीय आशीर्वाद पाने के लिए इस पवित्र स्थल पर आते हैं। यह व्रत एक माँ की अपने बच्चे के प्रति अटूट भक्ति, उनके आध्यात्मिक बंधन को पोषित करने और एक उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने को दर्शाता है