फगवाड़ा (पुनीत) पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग द्वारा भारत के भूतपूर्व गृह मंत्री स्व. बूटा सिंह बारे की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सख्त एतराज व्यक्त करते हुए आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और फगवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के इंचार्ज हरनूर सिंह हरजी मान ने आज यहां गंभीर लहजे में कहा कि राजा वडि़ंग जैसे घटिया लोग स्व. बूटा सिंह के चरणों की धूल के बराबर भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजा वडि़ंग को नस्लवादी टिप्पणी करने से पहले सरदार बूटा सिंह के जीवन और संघर्ष के बारे में जानकारी लेनी चाहिए थी। गौरतलब है कि आप नेता हरजी मान के पिता और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री स. जोगिंदर सिंह मान बूटा सिंह के भांजे हैं। पंजाब कांग्रेस प्रधान राजा वडि़ंग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह तरनतारन विधानसभा उप चुनाव के प्रचार के दौरान स्व. वह बूटा सिंह को चारा कुतरने वाला काला आदमी बताते हैं और कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें देश का गृह मंत्री बनाया। हरजी मान ने कहा कि बूटा सिंह ने राजनीति में जो कुछ भी हासिल किया, वह अपनी मेहनत के बल पर किया है, किसी की मेहरबानी से नहीं। उन्होंने कहा कि सरदार बूटा सिंह ने बचपन में एक पाठी सिंह के रूप में गरीबी से जूझते हुए पढ़ाई की। बाद में उन्होंने जालंधर के खालसा कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की। फिर पत्रकारिता करते हुए वे पंजाब के मुद्दों से जुड़े लेख लिखते थे। उनकी योग्यता को देखते हुए मास्टर तारा सिंह ने उन्हें अकाली दल से लोकसभा का चुनाव लड़वाया और सरदार बूटा सिंह ने भारत की लोकसभा में पंजाब के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। बाद में वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और अपनी मेहनत और योग्यता के कारण उन्हें देश के गृह मंत्री बनाया गया। इसके अलावा वे आठ बार सांसद रहे। हरजी मान ने कहा कि 1982 की दिल्ली एशियाई खेलों के सफल आयोजन में भी सरदार बूटा सिंह ने अहम भूमिका निभाई। वे केन्द्रीय रेल मंत्री और गृह मंत्री ही नहीं रहे बल्कि एस.सी. आयोग भारत के चेयरमैन और बिहार के गवर्नर भी बनें। उनके जैसे बड़े और कद्दावर व्यक्तित्व के बारे में बेहद घटिया और नस्लवादी टिप्पणी करने वाले अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग के खिलाफ न केवल सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, बल्कि उन्हें पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से भी हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से भी पूछा कि पुराने और वरिष्ठ नेताओं की पार्टी में क्या यही ईज्जत रह गई है? कांग्रेस की नई पीढ़ी के नेता पार्टी को शीर्ष पर ले जाने वालों के बारे में इसी तरह की घृणित मानसिकता से ग्रस्त हैं?